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'पश्चिम एशिया में मध्यस्थता को लेकर भारत-पाकिस्तान की तुलना गलत', भारत के राजदूत ने बताई वजह

 Edited By: Vinay Trivedi @JournoVinay
 Published : Jul 04, 2026 03:00 pm IST,  Updated : Jul 04, 2026 06:26 pm IST

मध्य-पूर्व में मध्यस्थता के सवाल पर चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने कहा कि हमारी पाकिस्तान की तुलना गलत है। दोनों देशों की इकोनॉमी का अंतर ही बहुत कुछ बता देता है। देशों के तुलना वैश्विक व्यवस्था में रोल के आधार पर होनी चाहिए।

भारत के खिलाफ चीन-पाकिस्तान के एजेंडे का पर्दाफाश हो गया है। दरअसल, ईरान-अमेरिका जंग में 'मध्यस्थता' की बात पर भारत की तरफ से ऐसा जवाब दिया गया, जिससे पाकिस्तान और चीन दोनों की बोलती बंद हो गई। चीन में भारत के राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने मिडिल-ईस्ट के मौजूदा संकट में भारत और पाकिस्तान के रोल की तुलना करने को सिरे से खारिज कर दिया।

भारत की पाकिस्तान से तुलना उचित नहीं

राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने साफ कहा कि भारत की पाकिस्तान से तुलना उचित नहीं है क्योंकि दोनों देशों की आर्थिक क्षमता और वैश्विक भूमिका ही इस बड़े अंतर को स्पष्ट कर देती है। दरअसल, बीजिंग में चीन की त्सिंगहुआ यूनिवर्सिटी की तरफ से आयोजित वर्ल्ड पीस फोरम में एक चीनी पत्रकार ने भारत के ग्लोबल लीडरशिप में रोल और ईरान-अमेरिका विवाद में पाकिस्तान की मध्यस्थता के प्रयासों के बारे में सवाल पूछा।

वैश्विक व्यवस्था में रोल पर हो किसी भी देश का आकलन

इसके जवाब में विक्रम दोरईस्वामी ने कहा, 'अगर मैं सीधे तौर पर कहूं तो भारत और पाकिस्तान की आपस में तुलना करना थोड़ा अनुचित है। दोनों ही देशों की इकोनॉमी बहुत कुछ बता देती है।' उन्होंने कहा कि किसी भी देश का आकलन उसके असल योगदान और वैश्विक व्यवस्था में उसके रोल के आधार पर किया जाना चाहिए। उनके अनुसार, 'भारत का वैश्विक एकीकरण में रोल उस लेवल पर है, जिसकी तुलना अधिकतर देशों से नहीं की जा सकती।'

वैश्विक शांति के मामलों में योगदान के लिए तैयार रहता है भारत

चीन में भारतीय राजदूत विक्रम दोरईस्वामी ने कहा कि भारत, एशियाई और यूरोपीय देशों के साथ आर्थिक सहयोग को बढ़ा रहा है। साथ ही, वैश्विक शांति और सुरक्षा से जुड़े बड़े मामलों में भी योगदान देने के लिए तैयार रहता है।

हर देश को राष्ट्रीय हित में निर्णय लेने का हक

हालांकि, मध्यस्थता के प्रश्न पर विक्रम दोरईस्वामी ने कहा कि यह हर देश का अपना निर्णय होता है कि किसी विवाद में मध्यस्थ का रोल निभाना उसके राष्ट्रीय हित में है या नहीं। उन्होंने आगे कहा, 'हमने इतिहास में ऐसी भूमिका निभाई है, लेकिन फिलहाल जब इस इलाके में पहले से कई कोशिशें चल रही हैं, तो मुझे नहीं लगता कि इसमें शामिल होने से कोई खास फायदा होगा।'

चीन और भारत का रुख काफी हद तक एक समान

विक्रम दोरईस्वामी ने आगे कहा कि वेस्ट एशिया और यूक्रेन संकट जैसे अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर चीन और भारत का रुख काफी हद तक एक जैसा रहा है। उन्होंने कहा कि न तो भारत और ना ही चीन ने इन संकटों में औपचारिक तौर पर मध्यस्थता की पेशकश की है।

(इनपुट- PTI)

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